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सहीह मुस्लिम

नंबर 2501

नंबर 2501किताब 13, नंबर 7अरबी नंबरिंग 1080.04
وَحَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ، بِهَذَا الإِسْنَادِ وَقَالَ ذَكَرَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم رَمَضَانَ فَقَالَ ‏"‏ الشَّهْرُ تِسْعٌ وَعِشْرُونَ الشَّهْرُ هَكَذَا وَهَكَذَا وَهَكَذَا ‏"‏ ‏.‏ وَقَالَ ‏"‏ فَاقْدِرُوا لَهُ ‏"‏ ‏.‏ وَلَمْ يَقُلْ ‏"‏ ثَلاَثِينَ ‏"‏ ‏.‏
Ubaidullah narrated on the authority of the same chain of transmitters that the Messenger of Allah (ﷺ) made a mention of Ramadan and said:The month may consist of twenty-nine days, and it may be thus, thus and thus, and (he further) said: Calculate it, but he did not say thirty

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 13 · The Book of Fasting

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।