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सहीह मुस्लिम

नंबर 2487

नंबर 2487किताब 12, नंबर 224अरबी नंबरिंग 1075.02
حَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، وَأَبُو كُرَيْبٍ قَالاَ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عُرْوَةَ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْقَاسِمِ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، - رضى الله عنها - قَالَتْ كَانَتْ فِي بَرِيرَةَ ثَلاَثُ قَضِيَّاتٍ كَانَ النَّاسُ يَتَصَدَّقُونَ عَلَيْهَا وَتُهْدِي لَنَا فَذَكَرْتُ ذَلِكَ لِلنَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ ‏ "‏ هُوَ عَلَيْهَا صَدَقَةٌ وَلَكُمْ هَدِيَّةٌ فَكُلُوهُ ‏"‏ ‏.‏
A'isha (Allah be pleased with her) said:Three are the decions (of the Shari'ah that we have come to know) through Barira. The people gave her sadaqa and she offered us as gift. We made a mention of it to the Messenger of Allah (ﷺ), whereupon he said: It is a sadaqa for her and a gift for you; so eat it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।