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सहीह मुस्लिम

नंबर 2485

नंबर 2485किताब 12, नंबर 222अरबी नंबरिंग 1074.01
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَأَبُو كُرَيْبٍ قَالاَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، ح وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ، الْمُثَنَّى وَابْنُ بَشَّارٍ قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، كِلاَهُمَا عَنْ شُعْبَةَ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَنَسٍ، ح وَحَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُعَاذٍ، - وَاللَّفْظُ لَهُ - حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ قَتَادَةَ، سَمِعَ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ، قَالَ أَهْدَتْ بَرِيرَةُ إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم لَحْمًا تُصُدِّقَ بِهِ عَلَيْهَا فَقَالَ ‏ "‏ هُوَ لَهَا صَدَقَةٌ وَلَنَا هَدِيَّةٌ ‏"‏ ‏.‏
Anas b. Malik reported that Barira presented to the Messenger of Allah (ﷺ) a piece of meat which had been given to her as sadaqa. Upon this he (the Holy Prophet) said:That is a Sadaqa for her and a gift for us

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।