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सहीह मुस्लिम

नंबर 2476

नंबर 2476किताब 12, नंबर 213अरबी नंबरिंग 1070.01
حَدَّثَنِي هَارُونُ بْنُ سَعِيدٍ الأَيْلِيُّ، حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي عَمْرٌو، أَنَّ أَبَا يُونُسَ، مَوْلَى أَبِي هُرَيْرَةَ حَدَّثَهُ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ قَالَ ‏ "‏ إِنِّي لأَنْقَلِبُ إِلَى أَهْلِي فَأَجِدُ التَّمْرَةَ سَاقِطَةً عَلَى فِرَاشِي ثُمَّ أَرْفَعُهَا لآكُلَهَا ثُمَّ أَخْشَى أَنْ تَكُونَ صَدَقَةً فَأُلْقِيهَا ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:I go back to my family and I find a date lying on my bed. I then take it up to eat it, but then I throw it away fearing that it may be a Sadaqa

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।