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सहीह मुस्लिम

नंबर 2454

नंबर 2454किताब 12, नंबर 191अरबी नंबरिंग 1064.04
وَحَدَّثَنَا ابْنُ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ فُضَيْلٍ، عَنْ عُمَارَةَ بْنِ الْقَعْقَاعِ، بِهَذَا الإِسْنَادِ وَقَالَ بَيْنَ أَرْبَعَةِ نَفَرٍ زَيْدُ الْخَيْرِ وَالأَقْرَعُ بْنُ حَابِسٍ وَعُيَيْنَةُ بْنُ حِصْنٍ وَعَلْقَمَةُ بْنُ عُلاَثَةَ أَوْ عَامِرُ بْنُ الطُّفَيْلِ ‏.‏ وَقَالَ نَاشِزُ الْجَبْهَةِ ‏.‏ كَرِوَايَةِ عَبْدِ الْوَاحِدِ ‏.‏ وَقَالَ إِنَّهُ سَيَخْرُجُ مِنْ ضِئْضِئِ هَذَا قَوْمٌ وَلَمْ يَذْكُرْ ‏ "‏ لَئِنْ أَدْرَكْتُهُمْ لأَقْتُلَنَّهُمْ قَتْلَ ثَمُودَ ‏"‏ ‏.‏
This hadith has been narrated through another chain of transmitters, but no mention has been made of:" If I find them, I would kill them as the Thamud were killed

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।