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सहीह मुस्लिम

नंबर 2437

नंबर 2437किताब 12, नंबर 174अरबी नंबरिंग 1059.02
حَدَّثَنَا حَسَنٌ الْحُلْوَانِيُّ، وَعَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ، - وَهُوَ ابْنُ إِبْرَاهِيمَ بْنِ سَعْدٍ - حَدَّثَنَا أَبِي، عَنْ صَالِحٍ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، حَدَّثَنِي أَنَسُ بْنُ مَالِكٍ، أَنَّهُ قَالَ لَمَّا أَفَاءَ اللَّهُ عَلَى رَسُولِهِ مَا أَفَاءَ مِنْ أَمْوَالِ هَوَازِنَ ‏.‏ وَاقْتَصَّ الْحَدِيثَ بِمِثْلِهِ غَيْرَ أَنَّهُ قَالَ قَالَ أَنَسٌ فَلَمْ نَصْبِرْ ‏.‏ وَقَالَ فَأَمَّا أُنَاسٌ حَدِيثَةٌ أَسْنَانُهُمْ ‏.‏
Anas b. Malik reported that when Allah conferred upon His Messenger (ﷺ) the riches of Hawazin (without armed encounter) ; the rest of the hadith is the same except some variation (of words):" Anas said: We could not tolerate it and he also said: The people were immature in age

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।