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सहीह मुस्लिम

नंबर 2396

नंबर 2396किताब 12, नंबर 133अरबी नंबरिंग 1040.01
وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الأَعْلَى بْنُ عَبْدِ الأَعْلَى، عَنْ مَعْمَرٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُسْلِمٍ، أَخِي الزُّهْرِيِّ عَنْ حَمْزَةَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لاَ تَزَالُ الْمَسْأَلَةُ بِأَحَدِكُمْ حَتَّى يَلْقَى اللَّهَ وَلَيْسَ فِي وَجْهِهِ مُزْعَةُ لَحْمٍ ‏"‏ ‏.‏
Hamza. son of 'Abdullah, reported on the authority of his father that the Messenger of Allah (ﷺ) said:When a man is always begging from people. he would meet Allah (in a state) that there would be no flesh on his face

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।