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सहीह मुस्लिम

नंबर 2368

नंबर 2368किताब 12, नंबर 105अरबी नंबरिंग 1025.01
وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَابْنُ، نُمَيْرٍ وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ جَمِيعًا عَنْ حَفْصِ، بْنِ غِيَاثٍ - قَالَ ابْنُ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا حَفْصٌ، - عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ زَيْدٍ، عَنْ عُمَيْرٍ، مَوْلَى آبِي اللَّحْمِ قَالَ كُنْتُ مَمْلُوكًا فَسَأَلْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَأَتَصَدَّقُ مِنْ مَالِ مَوَالِيَّ بِشَىْءٍ قَالَ ‏ "‏ نَعَمْ وَالأَجْرُ بَيْنَكُمَا نِصْفَانِ ‏"‏ ‏.‏
Umair, the freed slave of Abi'l-Lahm reported:I was the slave (of Abi'l-Lahm). I asked the Messenger of Allah (ﷺ) if I could give some charity out of my master's wealth. He said: Yes, and the reward is half and half between you two

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।