सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 2363

नंबर 2363किताब 12, नंबर 100अरबी नंबरिंग 1023
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَأَبُو عَامِرٍ الأَشْعَرِيُّ وَابْنُ نُمَيْرٍ وَأَبُو كُرَيْبٍ كُلُّهُمْ عَنْ أَبِي أُسَامَةَ، - قَالَ أَبُو عَامِرٍ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، - حَدَّثَنَا بُرَيْدٌ، عَنْ جَدِّهِ أَبِي بُرْدَةَ، عَنْ أَبِي مُوسَى�� عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِنَّ الْخَازِنَ الْمُسْلِمَ الأَمِينَ الَّذِي يُنْفِذُ - وَرُبَّمَا قَالَ يُعْطِي - مَا أُمِرَ بِهِ فَيُعْطِيهِ كَامِلاً مُوَفَّرًا طَيِّبَةً بِهِ نَفْسُهُ فَيَدْفَعُهُ إِلَى الَّذِي أُمِرَ لَهُ بِهِ - أَحَدُ الْمُتَصَدِّقَيْنِ ‏"‏ ‏.‏
Abu Musa reported Allah's Apostle (ﷺ) as saying:The honest Muslim trustee who spends (sometimes he said" who gives" ) what he is commanded to do and he gives that in full with his heart overflowing with cheerfulness and he gives it to one to whom he is ordered, he is one of the givers of charity

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।