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सहीह मुस्लिम

नंबर 2353

नंबर 2353किताब 12, नंबर 90अरबी नंबरिंग 1017.03
حَدَّثَنِي عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ الْقَوَارِيرِيُّ، وَأَبُو كَامِلٍ وَمُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الْمَلِكِ الأُمَوِيُّ قَالُوا حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ، عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ عُمَيْرٍ، عَنِ الْمُنْذِرِ بْنِ جَرِيرٍ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ كُنْتُ جَالِسًا عِنْدَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَأَتَاهُ قَوْمٌ مُجْتَابِي النِّمَارِ وَسَاقُوا الْحَدِيثَ بِقِصَّتِهِ وَفِيهِ فَصَلَّى الظُّهْرَ ثُمَّ صَعِدَ مِنْبَرًا صَغِيرًا فَحَمِدَ اللَّهَ وَأَثْنَى عَلَيْهِ ثُمَّ قَالَ ‏"‏ أَمَّا بَعْدُ فَإِنَّ اللَّهَ أَنْزَلَ فِي كِتَابِهِ ‏{‏ يَا أَيُّهَا النَّاسُ اتَّقُوا رَبَّكُمُ‏}‏ الآيَةَ ‏"‏ ‏.‏
Mundhir b. Jarir narrated on the authority of his father:When we were sitting in the company of the Messenger of Allah (ﷺ). There came people dressed in striped woollen clothes, and the rest of the hadith in the same, and there (it is also mentioned):" He observed the Zuhr prayer and then climbed up a small pulpit, praised Allah, lauded Him, and then said: Verily Allah in His Book has revealed: 'O people, fear your Lord, ' etc." (iv)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।