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सहीह मुस्लिम

नंबर 2350

नंबर 2350किताब 12, नंबर 87अरबी नंबरिंग 1016.04
وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، وَابْنُ، بَشَّارٍ قَالاَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ عَمْرِو بْنِ مُرَّةَ، عَنْ خَيْثَمَةَ، عَنْ عَدِيِّ بْنِ حَاتِمٍ، عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ ذَكَرَ النَّارَ فَتَعَوَّذَ مِنْهَا وَأَشَاحَ بِوَجْهِهِ ثَلاَثَ مِرَارٍ ثُمَّ قَالَ ‏ "‏ اتَّقُوا النَّارَ وَلَوْ بِشِقِّ تَمْرَةٍ فَإِنْ لَمْ تَجِدُوا فَبِكَلِمَةٍ طَيِّبَةٍ ‏"‏ ‏.‏
Adi b. Hatim reported that the Messenger of Allah (ﷺ) made a mention of the Fire and sought refuge (with Allah against it). He turned aside his face three times and then said:Protect yourselves against Fire even if with half a date. But if you fail to find it (then protect yourselves against Fire) with the help of a pleasant word

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।