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सहीह मुस्लिम

नंबर 2347

नंबर 2347किताब 12, नंबर 84अरबी नंबरिंग 1016.01
حَدَّثَنَا عَوْنُ بْنُ سَلاَّمٍ الْكُوفِيُّ، حَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ مُعَاوِيَةَ الْجُعْفِيُّ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَعْقِلٍ، عَنْ عَدِيِّ بْنِ حَاتِمٍ، قَالَ سَمِعْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ مَنِ اسْتَطَاعَ مِنْكُمْ أَنْ يَسْتَتِرَ مِنَ النَّارِ وَلَوْ بِشِقِّ تَمْرَةٍ فَلْيَفْعَلْ ‏"‏ ‏.‏
Adi b. Hatim reported that he heard Allah's Messenger (way peace be upon him) as saying:He who among you can protect himself against Fire, he should do so, even if it should be with half a date

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।