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सहीह मुस्लिम

नंबर 2340

नंबर 2340किताब 12, नंबर 77अरबी नंबरिंग 157.04
وَحَدَّثَنَا أَبُو الطَّاهِرِ، حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ، عَنْ عَمْرِو بْنِ الْحَارِثِ، عَنْ أَبِي يُونُسَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لاَ تَقُومُ السَّاعَةُ حَتَّى يَكْثُرَ فِيكُمُ الْمَالُ فَيَفِيضَ حَتَّى يُهِمَّ رَبَّ الْمَالِ مَنْ يَقْبَلُهُ مِنْهُ صَدَقَةً وَيُدْعَى إِلَيْهِ الرَّجُلُ فَيَقُولُ لاَ أَرَبَ لِي فِيهِ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:The Last Hour will not come till wealth is abundant and overflowing, so much so that the owner of the property will think as to who will accept Sadaqa from him, and a person would be called to accept Sadaqa and he would say: I do not need it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।