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सहीह मुस्लिम

नंबर 2329

नंबर 2329किताब 12, नंबर 66अरबी नंबरिंग 1006
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ أَسْمَاءَ الضُّبَعِيُّ، حَدَّثَنَا مَهْدِيُّ بْنُ مَيْمُونٍ، حَدَّثَنَا وَاصِلٌ، مَوْلَى أَبِي عُيَيْنَةَ عَنْ يَحْيَى بْنِ عُقَيْلٍ، عَنْ يَحْيَى بْنِ يَعْمَرَ، عَنْ أَبِي الأَسْوَدِ الدِّيلِيِّ، عَنْ أَبِي، ذَرٍّ أَنَّ نَاسًا، مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالُوا لِلنَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم يَا رَسُولَ اللَّهِ ذَهَبَ أَهْلُ الدُّثُورِ بِالأُجُورِ يُصَلُّونَ كَمَا نُصَلِّي وَيَصُومُونَ كَمَا نَصُومُ وَيَتَصَدَّقُونَ بِفُضُولِ أَمْوَالِهِمْ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ أَوَلَيْسَ قَدْ جَعَلَ اللَّهُ لَكُمْ مَا تَصَّدَّقُونَ إِنَّ بِكُلِّ تَسْبِيحَةٍ صَدَقَةً وَكُلِّ تَكْبِيرَةٍ صَدَقَةٌ وَكُلِّ تَحْمِيدَةٍ صَدَقَةٌ وَكُلِّ تَهْلِيلَةٍ صَدَقَةٌ وَأَمْرٌ بِالْمَعْرُوفِ صَدَقَةٌ وَنَهْىٌ عَنْ مُنْكَرٍ صَدَقَةٌ وَفِي بُضْعِ أَحَدِكُمْ صَدَقَةٌ ‏"‏ ‏.‏ قَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ أَيَأْتِي أَحَدُنَا شَهْوَتَهُ وَيَكُونُ لَهُ فِيهَا أَجْرٌ قَالَ ‏"‏ أَرَأَيْتُمْ لَوْ وَضَعَهَا فِي حَرَامٍ أَكَانَ عَلَيْهِ فِيهَا وِزْرٌ فَكَذَلِكَ إِذَا وَضَعَهَا فِي الْحَلاَلِ كَانَ لَهُ أَجْرٌ ‏"‏ ‏.‏
अबू ज़र रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है, वह कहते हैं : नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कुछ सहाबा ने नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहा : हे अल्लाह के रसूल, धनवान लोग सवाब (पुण्य) ले गए; वे हमारी तरह नमाज़ पढ़ते हैं, हमारी तरह रोज़ा रखते हैं, और अपनी अतिरिक्त संपत्ति से सदक़ा (दान) करते हैं। नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया : ‎“‎क्या अल्लाह ने तुम्हारे लिए वह चीज़ें नहीं बनाई हैं, जिनसे तुम सदक़ा कर सकते हो? हर तस्बीह (सुब्हानल्लाह कहना) सदक़ा है, हर तकबीर (अल्लाहु अकबर कहना) सदक़ा है, हर तहमीद (अल्ह़म्दु लिल्लाह कहना) सदक़ा है, हर तहलील (ला इलाहा इल्लल्लाह कहना) सदक़ा है, भलाई का आदेश देना सदक़ा है, बुराई से रोकना सदक़ा है, और तुम्हारे किसी के साथ वैवाहिक संबंध बनाना भी सदक़ा है।‎”‎ सहाबा ने पूछा : हे अल्लाह के रसूल, क्या हम अपनी कामवासना पूरी करते हैं तो उसमें भी सवाब (पुण्य) मिलता है? नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कहा : “तुम्हारा क्या विचार है यदि वह इस कामवासना को हराम (अवैध) रूप से पूरी करता है, तो क्या उसे इस पर गुनाह नहीं होता? तो इसी तरह, जब वह इस कामवासना को हलाल (वैध) रूप से पूरी करताता है, तो उसे उस पर पुण्य मिलता है।"

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।