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सहीह मुस्लिम

नंबर 2314

नंबर 2314किताब 12, नंबर 51अरबी नंबरिंग 997.02
وَحَدَّثَنِي يَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ الدَّوْرَقِيُّ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ، - يَعْنِي ابْنَ عُلَيَّةَ - عَنْ أَيُّوبَ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، أَنَّ رَجُلاً، مِنَ الأَنْصَارِ - يُقَالُ لَهُ أَبُو مَذْكُورٍ - أَعْتَقَ غُلاَمًا لَهُ عَنْ دُبُرٍ يُقَالُ لَهُ يَعْقُوبُ وَسَاقَ الْحَدِيثَ بِمَعْنَى حَدِيثِ اللَّيْثِ ‏.‏
Jabir reported that a person among the Ansar who was called Abu Madhkur granted posthumous freedom to his slave who was called Ya'qub. The rest of the hadith is the same

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।