ख़ैसमा से रिवायत है, वह कहते हैं कि हम लोग अब्दुल्लाह बिन अम्र -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- के साथ बैठे हुए थे कि इसी बीच उनके घर की व्यवस्था से जुड़ा हुआ एक व्यक्ति उनके पास आया, तो उन्होंने उससे कहा : क्या तुमने ग़ुलामों को उनका राशन दे दिया? उसने कहा : नहीं, तो आपने फ़रमाया : जाओ और उनको राशन दे दो। फिर बताया कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : “किसी व्यक्ति के पापी (गुनहगार) होने के लिए बस इतना काफी है कि वह किसी ऐसे व्यक्ति का राशन रोक ले, जिसका राशन उसके हाथ में है।”
जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।