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सहीह मुस्लिम

नंबर 2310

नंबर 2310किताब 12, नंबर 47अरबी नंबरिंग 994
حَدَّثَنَا أَبُو الرَّبِيعِ الزَّهْرَانِيُّ، وَقُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، كِلاَهُمَا عَنْ حَمَّادِ بْنِ زَيْدٍ، - قَالَ أَبُو الرَّبِيعِ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، - حَدَّثَنَا أَيُّوبُ، عَنْ أَبِي قِلاَبَةَ، عَنْ أَبِي أَسْمَاءَ، عَنْ ثَوْبَانَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ أَفْضَلُ دِينَارٍ يُنْفِقُهُ الرَّجُلُ دِينَارٌ يُنْفِقُهُ عَلَى عِيَالِهِ وَدِينَارٌ يُنْفِقُهُ الرَّجُلُ عَلَى دَابَّتِهِ فِي سَبِيلِ اللَّهِ وَدِينَارٌ يُنْفِقُهُ عَلَى أَصْحَابِهِ فِي سَبِيلِ اللَّهِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو قِلاَبَةَ وَبَدَأَ بِالْعِيَالِ ثُمَّ قَالَ أَبُو قِلاَبَةَ وَأَىُّ رَجُلٍ أَعْظَمُ أَجْرًا مِنْ رَجُلٍ يُنْفِقُ عَلَى عِيَالٍ صِغَارٍ يُعِفُّهُمْ أَوْ يَنْفَعُهُمُ اللَّهُ بِهِ وَيُغْنِيهِمْ ‏.‏
स़ौबान रज़ियल्लाहु अन्हु से वर्णनित है, वह बयान करते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "सबसे उत्तम दीनार जिसे इंसान ख़र्च करता है, वह दीनार है जिसे वह अपने परिवार पर ख़र्च करता है, फिर वह दीनार है जो वह अल्लाह की राह में जिहाद करने के लिए खास किए हुए जानवर पर ख़र्च करता है, और फिर वह दीनार है जिसे वह अल्लाह के रास्ते में अपने साथियों पर ख़र्च करता है।" अबू क़िलाबा कहते हैं कि शुरूआत परिवार से की। फिर अबू क़िलाबा ने कहा कि भला कौन व्यक्ति, उस आदमी से पुण्य में बढ़ सकता है, जो अपने छोटे-छोटे बच्चों पर खर्च करता है, ताकि वे दूसरों के सामने हाथ फैलाने पर मजबूर न हों या अल्लाह तआला उन्हें उसके द्वारा लाभ पहुँचाए तथा उनको निस्पृह कर दे।

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।