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सहीह मुस्लिम

नंबर 2293

नंबर 2293किताब 12, नंबर 31अरबी नंबरिंग 987.04
وَحَدَّثَنَاهُ قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ، - يَعْنِي الدَّرَاوَرْدِيَّ - عَنْ سُهَيْلٍ، بِهَذَا الإِسْنَادِ ‏.‏ وَسَاقَ الْحَدِيثَ ‏.‏ وَحَدَّثَنِيهِ مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ بَزِيعٍ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ زُرَيْعٍ، حَدَّثَنَا رَوْحُ بْنُ الْقَاسِمِ، حَدَّثَنَا سُهَيْلُ بْنُ أَبِي صَالِحٍ، بِهَذَا الإِسْنَادِ وَقَالَ بَدَلَ عَقْصَاءُ عَضْبَاءُ وَقَالَ ‏ "‏ فَيُكْوَى بِهَا جَنْبُهُ وَظَهْرُهُ ‏"‏ ‏.‏ وَلَمْ يَذْكُرْ جَبِينُهُ ‏.‏
This hadith has been narrated by Suhail b. Abu Salih with the same chain of transmitters, and he said he substituted the word aqsa' with 'adba' and said:" his side and his back," but he made no mention of his forehead

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।