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सहीह मुस्लिम

नंबर 2291

नंबर 2291किताब 12, नंबर 29अरबी नंबरिंग 987.02
وَحَدَّثَنِي يُونُسُ بْنُ عَبْدِ الأَعْلَى الصَّدَفِيُّ، أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ، حَدَّثَنِي هِشَامُ، بْنُ سَعْدٍ عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ، فِي هَذَا الإِسْنَادِ بِمَعْنَى حَدِيثِ حَفْصِ بْنِ مَيْسَرَةَ إِلَى آخِرِهِ غَيْرَ أَنَّهُ قَالَ ‏"‏ مَا مِنْ صَاحِبِ إِبِلٍ لاَ يُؤَدِّي حَقَّهَا ‏"‏ ‏.‏ وَلَمْ يَقُلْ ‏"‏ مِنْهَا حَقَّهَا ‏"‏ ‏.‏ وَذَكَرَ فِيهِ ‏"‏ لاَ يَفْقِدُ مِنْهَا فَصِيلاً وَاحِدًا ‏"‏ ‏.‏ وَقَالَ ‏"‏ يُكْوَى بِهَا جَنْبَاهُ وَجَبْهَتُهُ وَظَهْرُهُ ‏"‏ ‏.‏
This hadith has been narrated by Zaid b. Aslam with the same chain of transmitters except that he said:" None among the owners of camels who does not pay their due," but did not say" their due (Zakat) out of them." and he make a mention:" He did not miss a single young one out of them." and he said:" Their sides. their foreheads and their backs would be cauterised

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।