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सहीह मुस्लिम

नंबर 2278

नंबर 2278किताब 12, नंबर 16अरबी नंबरिंग 984.01
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ بْنِ قَعْنَبٍ، وَقُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا مَالِكٌ، ح وَحَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، - وَاللَّفْظُ لَهُ - قَالَ قَرَأْتُ عَلَى مَالِكٍ عَنْ نَافِعٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَرَضَ زَكَاةَ الْفِطْرِ مِنْ رَمَضَانَ عَلَى النَّاسِ صَاعًا مِنْ تَمْرٍ أَوْ صَاعًا مِنْ شَعِيرٍ عَلَى كُلِّ حُرٍّ أَوْ عَبْدٍ ذَكَرٍ أَوْ أُنْثَى مِنَ الْمُسْلِمِينَ ‏.‏
Ibn Umar said that Allah's Messenger (way peace be upon him) prescribed the payment of Zakat-ul-Fitr (on breaking the fast) of Ramadan for people, for every freeman, or slave, male and female among the Muslims-one sa' of dried dates, or one sa' of barley

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।