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सहीह मुस्लिम

नंबर 2268

नंबर 2268किताब 12, नंबर 6अरबी नंबरिंग 979.06
وَحَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ مَنْصُورٍ، أَخْبَرَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ، - يَعْنِي ابْنَ مَهْدِيٍّ - حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ إِسْمَاعِيلَ بْنِ أُمَيَّةَ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ يَحْيَى بْنِ حَبَّانَ، عَنْ يَحْيَى بْنِ عُمَارَةَ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لَيْسَ فِي حَبٍّ وَلاَ تَمْرٍ صَدَقَةٌ حَتَّى يَبْلُغَ خَمْسَةَ أَوْسُقٍ وَلاَ فِيمَا دُونَ خَمْسِ ذَوْدٍ صَدَقَةٌ وَلاَ فِيمَا دُونَ خَمْسِ أَوَاقٍ صَدَقَةٌ‏"‏ ‏.‏
Abu Sa'id al-Khudri reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:No Sadaqa is payable on the grains and dates till it (comes to the Weight) of five wasqs, or less than five heads of camels, or less than five uqiyas (of silver)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।