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सहीह मुस्लिम

नंबर 2201

नंबर 2201किताब 11, नंबर 79अरबी नंबरिंग 949.02
وَحَدَّثَنِي أَبُو الرَّبِيعِ الزَّهْرَانِيُّ، حَدَّثَنَا حَمَّادٌ يَعْنِي ابْنَ زَيْدٍ، ح وَحَدَّثَنِي يَحْيَى بْنُ، يَحْيَى أَخْبَرَنَا جَعْفَرُ بْنُ سُلَيْمَانَ، كِلاَهُمَا عَنْ ثَابِتٍ، عَنْ أَنَسٍ، قَالَ مُرَّ عَلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بِجَنَازَةٍ ‏.‏ فَذَكَرَ بِمَعْنَى حَدِيثِ عَبْدِ الْعَزِيزِ عَنْ أَنَسٍ غَيْرَ أَنَّ حَدِيثَ عَبْدِ الْعَزِيزِ أَتَمُّ ‏.‏
This hadith has been narrated through another chain of transmitters

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 11 · The Book of Prayer - Funerals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।