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सहीह मुस्लिम

नंबर 2188

नंबर 2188किताब 11, नंबर 66अरबी नंबरिंग 944.03
وَحَدَّثَنِي أَبُو الطَّاهِرِ، وَحَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى، وَهَارُونُ بْنُ سَعِيدٍ الأَيْلِيُّ، قَالَ هَارُونُ حَدَّثَنَا وَقَالَ الآخَرَانِ، أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي يُونُسُ بْنُ يَزِيدَ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو أُمَامَةَ بْنُ سَهْلِ بْنِ حُنَيْفٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ أَسْرِعُوا بِالْجَنَازَةِ فَإِنْ كَانَتْ صَالِحَةً قَرَّبْتُمُوهَا إِلَى الْخَيْرِ وَإِنْ كَانَتْ غَيْرَ ذَلِكَ كَانَ شَرًّا تَضَعُونَهُ عَنْ رِقَابِكُمْ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported Allah's Messenger as saying:Hasten at a funeral, for if (the dead person) is good, you would (soon) bring him close to the good. And if it is otherwise, it is an evil of which you are ridding yourselves

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 11 · The Book of Prayer - Funerals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।