सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 2132

नंबर 2132किताब 11, नंबर 10अरबी नंबरिंग 921.01
وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَخْبَرَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ، عَنِ الْعَلاَءِ بْنِ، يَعْقُوبَ قَالَ أَخْبَرَنِي أَبِي أَنَّهُ، سَمِعَ أَبَا هُرَيْرَةَ، يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ أَلَمْ تَرَوُا الإِنْسَانَ إِذَا مَاتَ شَخَصَ بَصَرُهُ ‏"‏ ‏.‏ قَالُوا بَلَى ‏.‏ قَالَ ‏"‏ فَذَلِكَ حِينَ يَتْبَعُ بَصَرُهُ نَفْسَهُ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:Did you not see when the man died and his eyes were fixedly open? He (Abu Huraira) said: Yes. He (the Holy Prophet) said: It is due to the fact that when (the soul leaves the body) his eyesight follows the soul

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 11 · The Book of Prayer - Funerals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।