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सहीह मुस्लिम

नंबर 518

नंबर 518किताब 1, नंबर 424अरबी नंबरिंग 214
حَدَّثَنِي أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ غِيَاثٍ، عَنْ دَاوُدَ، عَنِ الشَّعْبِيِّ، عَنْ مَسْرُوقٍ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ ابْنُ جُدْعَانَ كَانَ فِي الْجَاهِلِيَّةِ يَصِلُ الرَّحِمَ وَيُطْعِمُ الْمِسْكِينَ فَهَلْ ذَاكَ نَافِعُهُ قَالَ ‏ "‏ لاَ يَنْفَعُهُ إِنَّهُ لَمْ يَقُلْ يَوْمًا رَبِّ اغْفِرْ لِي خَطِيئَتِي يَوْمَ الدِّينِ ‏"‏ ‏.‏
आइशा रज़ियल्लाहु अनहा का वर्णन है, वह कहती हैं : मैंने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! इब्न-ए-जुदआन जाहिलियत के ज़माने में रिश्ते-नातों का ख़्याल रखता था और निर्धनों को खाना खिलाता था। क्या यह बातें उसके लिए लाभकारी सिद्ध होंगी? आपने कहा : "इन कामों का उसे कोई लाभ नहीं मिलेगा। उसने कभी यह नहीं कहा : ऐ मेरे रब! प्रतिफल के दिन मेरे गुनाह माफ़ कर देना।"

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।