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सहीह मुस्लिम

नंबर 496

नंबर 496किताब 1, नंबर 402अरबी नंबरिंग 200.03
وَحَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، ح وَحَدَّثَنِيهِ إِبْرَاهِيمُ بْنُ سَعِيدٍ الْجَوْهَرِيُّ، حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، جَمِيعًا عَنْ مِسْعَرٍ، عَنْ قَتَادَةَ، بِهَذَا الإِسْنَادِ غَيْرَ أَنَّ فِي، حَدِيثِ وَكِيعٍ قَالَ قَالَ ‏ "‏ أُعْطِيَ ‏"‏ ‏.‏ وَفِي حَدِيثِ أَبِي أُسَامَةَ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ‏.‏
Mis'ar transmitted it with the same chain of narrators from Qatada except that in the hadith narrated by Waki' (the Prophet) said:" He was endowed," and in the hadith reported by Abu Usama (the words are):" It is reported from the Messenger of Allah (ﷺ)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।