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सहीह मुस्लिम

नंबर 487

नंबर 487किताब 1, नंबर 393अरबी नंबरिंग 198.01
حَدَّثَنِي يُونُسُ بْنُ عَبْدِ الأَعْلَى، أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي مَالِكُ بْنُ أَنَسٍ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لِكُلِّ نَبِيٍّ دَعْوَةٌ يَدْعُوهَا فَأُرِيدُ أَنْ أَخْتَبِئَ دَعْوَتِي شَفَاعَةً لأُمَّتِي يَوْمَ الْقِيَامَةِ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported:Verity the Messenger of Allah (ﷺ) said: There is for every apostle a (special) prayer with which he would pray. I wish I could reserve, my prayer for intercession of my Ummah on the Day of Resurrection

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।