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सहीह मुस्लिम

नंबर 485

नंबर 485किताब 1, नंबर 391अरबी नंबरिंग 196.03
وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا حُسَيْنُ بْنُ عَلِيٍّ، عَنْ زَائِدَةَ، عَنِ الْمُخْتَارِ بْنِ فُلْفُلٍ، قَالَ قَالَ أَنَسُ بْنُ مَالِكٍ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ أَنَا أَوَّلُ شَفِيعٍ فِي الْجَنَّةِ لَمْ يُصَدَّقْ نَبِيٌّ مِنَ الأَنْبِيَاءِ مَا صُدِّقْتُ وَإِنَّ مِنَ الأَنْبِيَاءِ نَبِيًّا مَا يُصَدِّقُهُ مِنْ أُمَّتِهِ إِلاَّ رَجُلٌ وَاحِدٌ ‏"‏ ‏.‏
Anas b. Malik said:The Apostle of Allah (ﷺ) said: I would be the first intercessor in the Paradise and no apostle amongst the apostles has been testified (by such a large number of people) as I have been testified. And verily there woald be an apostle among the apostles who would be testified to by only one man from his people

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।