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सहीह मुस्लिम

नंबर 483

नंबर 483किताब 1, नंबर 389अरबी नंबरिंग 196.01
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، وَإِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ قُتَيْبَةُ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنِ الْمُخْتَارِ بْنِ فُلْفُلٍ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ أَنَا أَوَّلُ النَّاسِ يَشْفَعُ فِي الْجَنَّةِ وَأَنَا أَكْثَرُ الأَنْبِيَاءِ تَبَعًا ‏"‏ ‏.‏
Anas b. Malik reported:The Messenger of Allah (ﷺ) said: I would be the first among people to intercede in the Paradise and amongst the apostles I would have the largest following (on the Day of Resurrection)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।