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सहीह मुस्लिम

नंबर 474

नंबर 474किताब 1, नंबर 380अरबी नंबरिंग 192
حَدَّثَنَا هَدَّابُ بْنُ خَالِدٍ الأَزْدِيُّ، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي عِمْرَانَ، وَثَابِتٍ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ يَخْرُجُ مِنَ النَّارِ أَرْبَعَةٌ فَيُعْرَضُونَ عَلَى اللَّهِ فَيَلْتَفِتُ أَحَدُهُمْ فَيَقُولُ أَىْ رَبِّ إِذْ أَخْرَجْتَنِي مِنْهَا فَلاَ تُعِدْنِي فِيهَا ‏.‏ فَيُنْجِيهِ اللَّهُ مِنْهَا ‏"‏ ‏.‏
It is narrated on the authority of Anas b. Malik that the Messenger of Allah (ﷺ) said:Four persons would be brought out from the Fire and would be presented to Allah. One of them would turn (towards the He) ) ) and say: O my Lord, when Thou hast brought me out from it, do not throw me back into it, and Allah would rescue him from it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।