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सहीह मुस्लिम

नंबर 472

नंबर 472किताब 1, नंबर 378अरबी नंबरिंग 191.04
حَدَّثَنَا حَجَّاجُ بْنُ الشَّاعِرِ، حَدَّثَنَا أَبُو أَحْمَدَ الزُّبَيْرِيُّ، حَدَّثَنَا قَيْسُ بْنُ سُلَيْمٍ الْعَنْبَرِيُّ، قَالَ حَدَّثَنِي يَزِيدُ الْفَقِيرُ، حَدَّثَنَا جَابِرُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِنَّ قَوْمًا يُخْرَجُونَ مِنَ النَّارِ يَحْتَرِقُونَ فِيهَا إِلاَّ دَارَاتِ وُجُوهِهِمْ حَتَّى يَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ ‏"‏ ‏.‏
Jabir b. 'Abdullah repotted:The Messenger of Allah (ﷺ) said: Verily people would be brought out from the Fire, and they would be burnt except the exterior (surfaces, fronts) of their faces; and they would enter Paradise

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।