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सहीह मुस्लिम

नंबर 465

नंबर 465किताब 1, नंबर 370अरबी नंबरिंग 189.01
حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ عَمْرٍو الأَشْعَثِيُّ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ مُطَرِّفٍ، وَابْنِ، أَبْجَرَ عَنِ الشَّعْبِيِّ، قَالَ سَمِعْتُ الْمُغِيرَةَ بْنَ شُعْبَةَ، رِوَايَةً إِنْ شَاءَ اللَّهُ ح وَحَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، حَدَّثَنَا مُطَرِّفُ بْنُ طَرِيفٍ، وَعَبْدُ الْمَلِكِ بْنُ سَعِيدٍ، سَمِعَا الشَّعْبِيَّ، يُخْبِرُ عَنِ الْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَ، قَالَ سَمِعْتُهُ عَلَى الْمِنْبَرِ، يَرْفَعُهُ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏.‏
The same hadith has been by AlMughirah bin Shu’bah attributing it to the Messenger of Allah (ﷺ)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।