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सहीह मुस्लिम

नंबर 458

नंबर 458किताब 1, नंबर 363अरबी नंबरिंग 184.02
وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَفَّانُ، حَدَّثَنَا وُهَيْبٌ، ح وَحَدَّثَنَا حَجَّاجُ بْنُ الشَّاعِرِ، حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ عَوْنٍ، أَخْبَرَنَا خَالِدٌ، كِلاَهُمَا عَنْ عَمْرِو بْنِ يَحْيَى، بِهَذَا الإِسْنَادِ وَقَالاَ فَيُلْقَوْنَ فِي نَهْرٍ يُقَالُ لَهُ الْحَيَاةُ ‏.‏ وَلَمْ يَشُكَّا ‏.‏ وَفِي حَدِيثِ خَالِدٍ كَمَا تَنْبُتُ الْغُثَاءَةُ فِي جَانِبِ السَّيْلِ ‏.‏ وَفِي حَدِيثِ وُهَيْبٍ كَمَا تَنْبُتُ الْحِبَّةُ فِي حَمِئَةٍ أَوْ حَمِيلَةِ السَّيْلِ ‏.‏
This hadith is transmitted by 'Amr b. Yahya with the same chain of transmitters who narrated:They would be cast into the river which is called (the river of) life, and (both the narrators) did not doubt the hadith. The text transmitted by Khalid is: just as seeds sprout beside the flood water; and in the hadith of Wuhaib it is: Just as the seed sprouts in the silt or deposit left by flood

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।