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सहीह मुस्लिम

नंबर 446

नंबर 446किताब 1, नंबर 351अरबी नंबरिंग 179.02
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، أَخْبَرَنَا جَرِيرٌ، عَنِ الأَعْمَشِ، بِهَذَا الإِسْنَادِ قَالَ قَامَ فِينَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِأَرْبَعِ كَلِمَاتٍ ‏.‏ ثُمَّ ذَكَرَ بِمِثْلِ حَدِيثِ أَبِي مُعَاوِيَةَ وَلَمْ يَذْكُرْ ‏ "‏ مِنْ خَلْقِهِ ‏"‏ ‏.‏ وَقَالَ حِجَابُهُ النُّورُ ‏.‏
A'mash has narrated this hadith on the same authority and said:The Messenger of Allah (ﷺ) was standing amongst us and he told us four things. He then narrated the hadith like the one reported by Abu Mua'wiya, but did not mention the words" His creation" and said: His veil is the light

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।