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सहीह मुस्लिम

नंबर 443

नंबर 443किताब 1, नंबर 348अरबी नंबरिंग 178.01
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ شَقِيقٍ، عَنْ أَبِي ذَرٍّ، قَالَ سَأَلْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم هَلْ رَأَيْتَ رَبَّكَ قَالَ ‏ "‏ نُورٌ أَنَّى أَرَاهُ ‏"‏ ‏.‏
It is narrated on the authority of Abu Dharr:I asked the Messenger of Allah (ﷺ): Did you see thy Lord? He said: (He is) Light; how could I see Him?

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।