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सहीह मुस्लिम

नंबर 437

नंबर 437किताब 1, नंबर 342अरबी नंबरिंग 176.02
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَأَبُو سَعِيدٍ الأَشَجُّ جَمِيعًا عَنْ وَكِيعٍ، - قَالَ الأَشَجُّ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، - حَدَّثَنَا الأَعْمَشُ، عَنْ زِيَادِ بْنِ الْحُصَيْنِ أَبِي جَهْمَةَ، عَنْ أَبِي الْعَالِيَةِ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ ‏{‏ مَا كَذَبَ الْفُؤَادُ مَا رَأَى‏}‏ ‏{‏ وَلَقَدْ رَآهُ نَزْلَةً أُخْرَى‏}‏ قَالَ رَآهُ بِفُؤَادِهِ مَرَّتَيْنِ ‏.‏
It is narrated on the authority of Ibn Abbas that the words:" The heart belied not what he saw" (al-Qur'an, Iiii. 11) and" Certainly he saw Him in another descent" (al-Qur'an, Iiii. 13) imply that he saw him twice with his heart

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।