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सहीह मुस्लिम

नंबर 412

नंबर 412किताब 1, नंबर 317अरबी नंबरिंग 162.02
حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ هَاشِمٍ الْعَبْدِيُّ، حَدَّثَنَا بَهْزُ بْنُ أَسَدٍ، حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ الْمُغِيرَةِ، حَدَّثَنَا ثَابِتٌ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ أُتِيتُ فَانْطَلَقُوا بِي إِلَى زَمْزَمَ فَشُرِحَ عَنْ صَدْرِي ثُمَّ غُسِلَ بِمَاءِ زَمْزَمَ ثُمَّ أُنْزِلْتُ ‏"‏ ‏.‏
It is narrated on the the outhority of Anas b. Malik that the Messenger of Allah (ﷺ) said:(the angels) came to me and took me to the Zamzam and my heart was opened and washed with the water of Zamzam and then I was left (at my place)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।