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सहीह मुस्लिम

नंबर 402

नंबर 402किताब 1, नंबर 307अरबी नंबरिंग 159.04
حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ الأَشَجُّ، وَإِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، - قَالَ إِسْحَاقُ أَخْبَرَنَا وَقَالَ الأَشَجُّ، حَدَّثَنَا - وَكِيعٌ، حَدَّثَنَا الأَعْمَشُ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ التَّيْمِيِّ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي ذَرٍّ، قَالَ سَأَلْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَنْ قَوْلِ اللَّهِ تَعَالَى ‏{‏ وَالشَّمْسُ تَجْرِي لِمُسْتَقَرٍّ لَهَا‏}‏ قَالَ ‏"‏ مُسْتَقَرُّهَا تَحْتَ الْعَرْشِ ‏"‏ ‏.‏
Abu Dharr reported:I asked the Messenger of Allah (ﷺ) the (implication of the) words of Allah, the Exalted: The sun glides to its appointed resting place. He replied: Its appointed resting place is under the Throne

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।