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सहीह मुस्लिम

नंबर 400

नंबर 400किताब 1, नंबर 305अरबी नंबरिंग 159.02
وَحَدَّثَنِي عَبْدُ الْحَمِيدِ بْنُ بَيَانٍ الْوَاسِطِيُّ، أَخْبَرَنَا خَالِدٌ، - يَعْنِي ابْنَ عَبْدِ اللَّهِ - عَنْ يُونُسَ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ التَّيْمِيِّ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي ذَرٍّ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ يَوْمًا ‏ "‏ أَتَدْرُونَ أَيْنَ تَذْهَبُ هَذِهِ الشَّمْسُ ‏"‏ بِمِثْلِ مَعْنَى حَدِيثِ ابْنِ عُلَيَّةَ ‏.‏
It is narrated on the authority of Abu Dharr that the Messenger of Allah (ﷺ) one day said:Do you know where the sun goes? The remaining part of the hadith is the same

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।