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सहीह मुस्लिम

नंबर 398

नंबर 398किताब 1, नंबर 303अरबी नंबरिंग 158
وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، ح وَحَدَّثَنِيهِ زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ يُوسُفَ الأَزْرَقُ، جَمِيعًا عَنْ فُضَيْلِ بْنِ غَزْوَانَ، ح وَحَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلاَءِ - وَاللَّفْظُ لَهُ - حَدَّثَنَا ابْنُ فُضَيْلٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي حَازِمٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ ثَلاَثٌ إِذَا خَرَجْنَ لاَ يَنْفَعُ نَفْسًا إِيمَانُهَا لَمْ تَكُنْ آمَنَتْ مِنْ قَبْلُ أَوْ كَسَبَتْ فِي إِيمَانِهَا خَيْرًا طُلُوعُ الشَّمْسِ مِنْ مَغْرِبِهَا وَالدَّجَّالُ وَدَابَّةُ الأَرْضِ ‏"‏ ‏.‏
It is narrated on the authority of Abu Huraira that the Messenger of Allah (ﷺ) observed:When three things appear faith will not benefit one who has not previously believed or has derived no good from his faith: the rising of the sun in its place of setting, the Dajjal, and the beast of the earth

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।