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सहीह मुस्लिम

नंबर 348

नंबर 348किताब 1, नंबर 255अरबी नंबरिंग 135.02
وَحَدَّثَنِيهِ زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، وَيَعْقُوبُ الدَّوْرَقِيُّ، قَالاَ حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ، وَهُوَ ابْنُ عُلَيَّةَ عَنْ أَيُّوبَ، عَنْ مُحَمَّدٍ، قَالَ قَالَ أَبُو هُرَيْرَةَ ‏ "‏ لاَ يَزَالُ النَّاسُ ‏"‏ ‏.‏ بِمِثْلِ حَدِيثِ عَبْدِ الْوَارِثِ غَيْرَ أَنَّهُ لَمْ يَذْكُرِ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فِي الإِسْنَادِ وَلَكِنْ قَدْ قَالَ فِي آخِرِ الْحَدِيثِ صَدَقَ اللَّهُ وَرَسُولُهُ ‏.‏
It is narrated on the authority of Abu Huraira that he said:The people will constantly, and the rest of the hadith is the same as that transmitted by 'Abdul-Warith with the exception that there is no mention of the Messenger of Allah in that, but he observed at the end of the hadith: Allah and His Messenger told the truth

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।