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सहीह मुस्लिम

नंबर 343

नंबर 343किताब 1, नंबर 250अरबी नंबरिंग 134.01
حَدَّثَنَا هَارُونُ بْنُ مَعْرُوفٍ، وَمُحَمَّدُ بْنُ عَبَّادٍ، - وَاللَّفْظُ لِهَارُونَ - قَالاَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ هِشَامٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لاَ يَزَالُ النَّاسُ يَتَسَاءَلُونَ حَتَّى يُقَالَ هَذَا خَلَقَ اللَّهُ الْخَلْقَ فَمَنْ خَلَقَ اللَّهَ فَمَنْ وَجَدَ مِنْ ذَلِكَ شَيْئًا فَلْيَقُلْ آمَنْتُ بِاللَّهِ ‏"‏ ‏.‏
It is narrated on the authority of Abu Huraira that the Messenger of Allah (ﷺ) said:Men will continue to question one another till this is propounded: Allah created all things but who created Allah? He who found himself confronted with such a situation should say: I affirm my faith in Allah

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।