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सहीह मुस्लिम

नंबर 331

नंबर 331किताब 1, नंबर 238अरबी नंबरिंग 127.01
حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ مَنْصُورٍ، وَقُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، وَمُحَمَّدُ بْنُ عُبَيْدٍ الْغُبَرِيُّ، - وَاللَّفْظُ لِسَعِيدٍ - قَالُوا حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ زُرَارَةَ بْنِ أَوْفَى، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِنَّ اللَّهَ تَجَاوَزَ لأُمَّتِي مَا حَدَّثَتْ بِهِ أَنْفُسَهَا مَا لَمْ يَتَكَلَّمُوا أَوْ يَعْمَلُوا بِهِ ‏"‏ ‏.‏
It is narrated on the authority of Abu Huraira that the Messenger of Allah (ﷺ) observed:Verily Allah forgave my people the evil promptings which arise within their hearts as long as they did not speak about them or did not act upon them

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।