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सहीह मुस्लिम

नंबर 280

नंबर 280किताब 1, नंबर 186अरबी नंबरिंग 98
حَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، وَمُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، قَالاَ حَدَّثَنَا يَحْيَى، - وَهُوَ الْقَطَّانُ - ح وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، وَابْنُ، نُمَيْرٍ كُلُّهُمْ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ح وَحَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، - وَاللَّفْظُ لَهُ - قَالَ قَرَأْتُ عَلَى مَالِكٍ عَنْ نَافِعٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَنْ حَمَلَ عَلَيْنَا السِّلاَحَ فَلَيْسَ مِنَّا ‏"‏ ‏.‏
It is narrated on the authority of Abdullah b. Umar who narrates from the Prophet of Allah (ﷺ) who said:He who took up arms against us is not of us

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।