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सहीह मुस्लिम

नंबर 266

नंबर 266किताब 1, नंबर 172अरबी नंबरिंग 91.02
حَدَّثَنَا مِنْجَابُ بْنُ الْحَارِثِ التَّمِيمِيُّ، وَسُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ، كِلاَهُمَا عَنْ عَلِيِّ بْنِ مُسْهِرٍ، - قَالَ مِنْجَابٌ أَخْبَرَنَا ابْنُ مُسْهِرٍ، - عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ عَلْقَمَةَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لاَ يَدْخُلُ النَّارَ أَحَدٌ فِي قَلْبِهِ مِثْقَالُ حَبَّةِ خَرْدَلٍ مِنْ إِيمَانٍ وَلاَ يَدْخُلُ الْجَنَّةَ أَحَدٌ فِي قَلْبِهِ مِثْقَالُ حَبَّةِ خَرْدَلٍ مِنْ كِبْرِيَاءَ ‏"‏ ‏.‏
It is narrated on the authority of 'Abdullah b. Mas'ud that the Messenger of Allah (ﷺ) observed:None shall enter the Fire (of Hell) who has in his heart the weight of a mustard seed of Iman and none shall enter Paradise who has in his heart the weight of a mustard seed of pride

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।