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सहीह मुस्लिम

नंबर 251

नंबर 251किताब 1, नंबर 157अरबी नंबरिंग 84.02
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، وَعَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ، قَالَ عَبْدٌ أَخْبَرَنَا وَقَالَ ابْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ حَبِيبٍ، مَوْلَى عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ، عَنْ أَبِي مُرَاوِحٍ، عَنْ أَبِي ذَرٍّ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بِنَحْوِهِ غَيْرَ أَنَّهُ قَالَ ‏ "‏ فَتُعِينُ الصَّانِعَ أَوْ تَصْنَعُ لأَخْرَقَ ‏"‏ ‏.‏
Muhammad b. Abu Rafi' narrated the hadith on the authority of Abu Dharr with a slight difference

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।