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सहीह मुस्लिम

नंबर 236

नंबर 236किताब 1, नंबर 142अरबी नंबरिंग 74.02
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَبِيبٍ الْحَارِثِيُّ، حَدَّثَنَا خَالِدٌ، - يَعْنِي ابْنَ الْحَارِثِ - حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ أَنَسٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ قَالَ ‏ "‏ حُبُّ الأَنْصَارِ آيَةُ الإِيمَانِ وَبُغْضُهُمْ آيَةُ النِّفَاقِ ‏"‏ ‏.‏
It is narrated on the authority of Anas that the Apostle (may peace and blessings be upon him) said:The love of the Ansar is the sign of faith and hatred against them is the sign of dissemblance

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।