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सहीह मुस्लिम

नंबर 232

नंबर 232किताब 1, नंबर 138अरबी नंबरिंग 72.01
حَدَّثَنِي حَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى، وَعَمْرُو بْنُ سَوَّادٍ الْعَامِرِيُّ، وَمُحَمَّدُ بْنُ سَلَمَةَ الْمُرَادِيُّ، قَالَ الْمُرَادِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ، عَنْ يُونُسَ، وَقَالَ الآخَرَانِ، أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي يُونُسُ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، قَالَ حَدَّثَنِي عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ، أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ أَلَمْ تَرَوْا إِلَى مَا قَالَ رَبُّكُمْ قَالَ مَا أَنْعَمْتُ عَلَى عِبَادِي مِنْ نِعْمَةٍ إِلاَّ أَصْبَحَ فَرِيقٌ مِنْهُمْ بِهَا كَافِرِينَ ‏.‏ يَقُولُونَ الْكَوَاكِبُ وَبِالْكَوَاكِبِ ‏"‏ ‏.‏
It is reported on the authority of Abu Huraira that the Messenger of Allah (may peace and blessings be upon him) said:Don't you know what your Lord said? He observed: I have never endowed My bondsmen with a favor, but a section amongst them disbelieved it and said: Stars, it was due to the stars

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।