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सहीह मुस्लिम

नंबर 228

नंबर 228किताब 1, नंबर 134अरबी नंबरिंग 68
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ السَّعْدِيُّ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ، - يَعْنِي ابْنَ عُلَيَّةَ - عَنْ مَنْصُورِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنِ الشَّعْبِيِّ، عَنْ جَرِيرٍ، أَنَّهُ سَمِعَهُ يَقُولُ ‏ "‏ أَيُّمَا عَبْدٍ أَبَقَ مِنْ مَوَالِيهِ فَقَدْ كَفَرَ حَتَّى يَرْجِعَ إِلَيْهِمْ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ مَنْصُورٌ قَدْ وَاللَّهِ رُوِيَ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم وَلَكِنِّي أَكْرَهُ أَنْ يُرْوَى عَنِّي هَا هُنَا بِالْبَصْرَةِ ‏.‏
It is narrated on the authority of Jarir that he heard (the Holy Prophet) saying, The slave who fled from his master committed an act of infidelity as long as he would not return to him. Mansur observed:By God, this hadith was narrated from the Apostle (may peace and blessings be upon him), but I do not like that this should be narrated on my authority here in Basra

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।