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सहीह मुस्लिम

नंबर 225

नंबर 225किताब 1, नंबर 131अरबी नंबरिंग 66.02
وَحَدَّثَنِي أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَأَبُو بَكْرِ بْنُ خَلاَّدٍ الْبَاهِلِيُّ قَالاَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ وَاقِدِ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ زَيْدٍ، أَنَّهُ سَمِعَ أَبَاهُ، يُحَدِّثُ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ قَالَ فِي حَجَّةِ الْوَدَاعِ ‏ "‏ وَيْحَكُمْ - أَوْ قَالَ وَيْلَكُمْ - لاَ تَرْجِعُوا بَعْدِي كُفَّارًا يَضْرِبُ بَعْضُكُمْ رِقَابَ بَعْضٍ ‏"‏ ‏.‏
It is narrated on the authority of Abdullah b. Umar that the Apostle (may peace and blessings be upon him) observed on the occasion of the Farewell Pilgrimage Woe unto you distress unto you! Don't turn back as unbelievers after me by striking the necks of one another

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।